PC पर रेट्रो गेम्स खेलना पुराने हार्डवेयर की तलाश किए बिना क्लासिक्स को दोबारा जीने का सबसे आसान तरीका है। चाहे आपको 1990s के स्ट्रेटजी गेम्स चाहिए, आर्केड फ़ाइटर्स, DOS एडवेंचर्स या कंसोल प्लेटफ़ॉर्मर्स — सही टूल्स के साथ एक मॉडर्न Windows मशीन दशकों के गेमिंग इतिहास को आराम से संभाल सकती है।
सबसे आसान रास्ते से शुरुआत करें: ऑफ़िशियल डिजिटल स्टोर्स। GOG और Steam कई क्लासिक PC गेम्स बेचते हैं जिनमें कम्पैटिबिलिटी फ़िक्स पहले से लगे होते हैं। StarCraft, Commandos, RollerCoaster Tycoon और Death Rally जैसे गेम्स अक्सर मौजूदा Windows पर बहुत कम सेटअप के साथ चल जाते हैं। अगर आप छेड़छाड़ से ज़्यादा सुविधा चाहते हैं, तो यही सबसे अच्छा पहला कदम है।
पुराने DOS गेम्स के लिए DOSBox आज भी ज़रूरी है। यह वह माहौल दोबारा बनाता है जिसकी शुरुआती PC गेम्स को उम्मीद होती है — मेमोरी लिमिट, साउंड हार्डवेयर और CPU स्पीड — ताकि 1980s और शुरुआती 1990s के गेम्स सही तरह से चलें। कई GOG रिलीज़ में DOSBox अपने-आप शामिल होता है, लेकिन जब आप कस्टम कॉन्फ़िगरेशन या ओरिजिनल डिस्क फ़ाइलें इस्तेमाल करना चाहें, तब इसकी बेसिक्स सीखना काम आता है।
सोर्स पोर्ट एक और दमदार विकल्प हैं। ये कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स किसी गेम के इंजन को मॉडर्न सिस्टम्स के लिए दोबारा बनाते हैं, जबकि ओरिजिनल गेम डेटा का ही इस्तेमाल करते हैं। इनसे वाइडस्क्रीन सपोर्ट, बेहतर कंट्रोल्स, बग फ़िक्स और ज़्यादा स्मूद परफ़ॉर्मेंस मिल सकती है। किसी पुराने पसंदीदा गेम को खत्म मान लेने से पहले सर्च करें कि उसका सोर्स पोर्ट मौजूद है या नहीं।
अगर आपका मकसद PC पर कंसोल क्लासिक्स खेलना है, तो एमुलेटर ही स्टैंडर्ड तरीका हैं। NES, SNES, Genesis, PlayStation और आर्केड हार्डवेयर के प्रोग्राम्स आपको अपने कंप्यूटर पर पुराने कंसोल और कॉइन-ऑप गेम्स खेलने देते हैं। कानूनी रूप से हासिल की गई गेम फ़ाइलें ही इस्तेमाल करें और बैकअप व BIOS फ़ाइलों से जुड़े अपने इलाके के कानूनों का सम्मान करें।
हार्डवेयर लोगों की सोच से ज़्यादा मायने रखता है। USB कंट्रोलर उन फ़ाइटिंग गेम्स, प्लेटफ़ॉर्मर्स और रेसिंग गेम्स का मज़ा बढ़ा देता है जो गेमपैड के लिए डिज़ाइन किए गए थे। RTS, पॉइंट-एंड-क्लिक और सिमुलेशन क्लासिक्स के लिए कीबोर्ड और माउस अब भी बेहतर हैं। शुरू करने से पहले पाँच मिनट निकालकर कंट्रोल्स मैप करें — अच्छा सेटअप पुराने गेम्स को फिर से नया-सा बना देता है।
डिस्प्ले सेटिंग्स भी मदद करती हैं। रेट्रो गेम्स 4:3 CRT स्क्रीन के लिए बनाए गए थे, अल्ट्रावाइड मॉनिटर के लिए नहीं। जहाँ तक हो सके सही आस्पेक्ट रेशियो रखें, और अगर कोई गेम बहुत शार्प या खिंचा हुआ लगे तो इंटीजर स्केलिंग या हल्के CRT-स्टाइल फ़िल्टर इस्तेमाल करें। मकसद नकली नॉस्टैल्जिया नहीं है; मकसद गेम को वैसे खेलना है जैसा उसके आर्टिस्ट्स ने उसे चलते हुए दिखने के लिए बनाया था।
जब कुछ गड़बड़ हो, तो कम्पैटिबिलिटी पैच सर्च करें। फ़ैन कम्युनिटीज़ हर साल पुराने कॉपी प्रोटेक्शन, गायब कोडेक्स, हाई-रिफ़्रेश-रेट क्रैश और मॉडर्न GPU की दिक्कतें ठीक करती रहती हैं। “यह पुराना गेम नहीं चल रहा” वाली ज़्यादातर समस्याओं की गाइड कहीं न कहीं पहले से मौजूद है।
शुरुआत का एक प्रैक्टिकल तरीका: कोई एक जॉनर चुनें जो आपको पहले से पसंद हो, एक गेम इंस्टॉल करें और उसे पूरा करें। स्ट्रेटजी के फ़ैंस StarCraft से शुरुआत कर सकते हैं। स्टेल्थ के फ़ैंस Commandos आज़मा सकते हैं। रेसिंग के फ़ैंस Death Rally या Ignition देख सकते हैं। फ़ाइटिंग गेम के फ़ैंस सीधे Street Fighter II या Alpha 3 में कूद सकते हैं। PC पर रेट्रो गेमिंग तब सबसे अच्छी लगती है जब आप एक बार में एक क्लासिक एक्सप्लोर करते हैं — तब नहीं जब आप एक ही शाम में बचपन की पूरी लाइब्रेरी दोबारा बनाने की कोशिश करते हैं।